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मानसून में देरी और कम बारिश की आशंका!

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जल संकट के लिए अभी से रहें तैयार : अनूप कश्यपी

पुणे : देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्व पुणे निदेशक अनूप कश्यपी ने बताया कि इस वर्ष केरल में मई महीने के दौरान मानसून के प्रवेश की संभावना नहीं है। साथ ही, देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने का अनुमान व्यक्त किया गया है, जिससे जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
उन्होंने बताया कि भारतीय मौसम विभाग के अद्यतन दीर्घकालिक पूर्वानुमान के अनुसार, पूरे देश में मानसूनी वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) के लगभग 90 प्रतिशत (±4 प्रतिशत) रहने की संभावना है। वर्तमान स्थिति में मानसून अभी तक केरल नहीं पहुंचा है, हालांकि अगले चार से पांच दिनों में मानसून की उत्तरी सीमा (NLM) के आगे बढ़ने की संभावना जताई गई है।
कश्यपी के अनुसार, केवल पूर्वोत्तर भारत में सामान्य वर्षा होने की संभावना है, जबकि देश के अधिकांश अन्य क्षेत्रों में औसत से कम बारिश होने का अनुमान है। जून महीने में भी वर्षा LPA के 92 प्रतिशत से कम रहने की आशंका व्यक्त की गई है, जो कृषि और जल संसाधनों के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों, स्थानीय प्रशासन, नगर निकायों तथा ग्रामीण क्षेत्रों को संभावित जल संकट से निपटने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। नागरिकों से भी पानी का उपयोग संयमित और योजनाबद्ध तरीके से करने की अपील की गई है।
कृषि क्षेत्र के लिए उन्होंने सलाह दी कि खरीफ फसलों की बुवाई उपलब्ध नमी और जल स्रोतों को ध्यान में रखकर की जाए। साथ ही, शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन तथा जल संरक्षण के उपायों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि संभावित जल संकट के प्रभाव को कम किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है तो इसका असर पेयजल आपूर्ति, कृषि उत्पादन और भूजल स्तर पर पड़ सकता है। ऐसे में जल संरक्षण और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

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