वर्ष में केवल एक बार मिलता है दुर्लभ दर्शन का अवसर, सुबह 5 बजे से रात 2 बजे तक रहेंगे दर्शन
पुणे- गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सोमवार पेठ स्थित ऐतिहासिक एवं स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना श्री त्रिशुंड गणपति मंदिर का तळघर (भूगर्भ कक्ष) श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बुधवार, 2९ जुलाई को प्रात: 5.00 बजे से रात 2.00 बजे तक खुला रहेगा। वर्षभर बंद रहने वाला यह तळघर केवल गुरु पूर्णिमा के अवसर पर ही श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है, जिससे इस दिन का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
मंदिर के तळघर में प्राकृतिक जलस्रोत (जीवंत झरना) होने के कारण सामान्य दिनों में वहां पानी भरा रहता है। गुरु पूर्णिमा से पूर्व मंदिर ट्रस्ट द्वारा विशेष साफ-सफाई कर तळघर को दर्शन योग्य बनाया जाता है। इसके बाद श्रद्धालुओं को इस दुर्लभ स्थान के दर्शन करने का अवसर प्राप्त होता है।
श्री त्रिशुंड गणपति मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला, उत्कृष्ट पत्थर की नक्काशी और भगवान गणेश की दुर्लभ तीन सूंड वाली प्रतिमा के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। 18वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर पुणे की ऐतिहासिक धरोहरों में प्रमुख स्थान रखता है। मंदिर की दीवारों पर बनी बारीक शिल्पकला, संस्कृत एवं फ़ारसी शिलालेख तथा दुर्लभ मूर्तियां इसे अन्य मंदिरों से अलग पहचान देती हैं।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट ने दर्शन व्यवस्था के लिए व्यापक तैयारी की है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुव्यवस्थित कतार व्यवस्था, स्वयंसेवकों की नियुक्ति, सुरक्षा प्रबंधन तथा आवश्यक सुविधाओं की विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि सभी श्रद्धालु शांतिपूर्वक और सुगमता से दर्शन कर सकें।
मंदिर ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित समय के अनुसार दर्शन के लिए आएं, व्यवस्था बनाए रखें तथा मंदिर की ऐतिहासिक धरोहर और प्राचीन शिल्पकला के संरक्षण में सहयोग करें।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर वर्ष में केवल एक बार मिलने वाले इस दुर्लभ अवसर का लाभ लेने के लिए पुणे सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने की संभावना है।
पुणे शहर में स्थित करीब 300 वर्ष पुराने त्रिशुंड मयूरेश्वर गणपति मंदिर का एक ऐसा रहस्य है, जो हर साल गुरु पूर्णिमा पर हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस ऐतिहासिक मंदिर का गुप्त तळघर (बेसमेंट) पूरे वर्ष बंद रहता है और केवल गुरु पूर्णिमा के दिन ही श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोला जाता है।
इस वर्ष 29 जुलाई 2026 (बुधवार) को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर यह दुर्लभ तहखाना एक बार फिर भक्तों के लिए खोला जाएगा। इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए पुणे ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
क्या है त्रिशुंड गणपति मंदिर का इतिहास?
सोमवार पेठ स्थित इस मंदिर की स्थापना 1754 ईस्वी में गोसावी संप्रदाय के संत भीमगिरि गोसावी ने कराई थी। मंदिर का निर्माण लगभग 16 वर्षों में पूरा हुआ और यह 1770 में पूर्ण रूप से तैयार हुआ।
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां विराजमान भगवान गणेश की अनोखी प्रतिमा है। यहां भगवान गणेश तीन सूंड (त्रिशुंड), छह भुजाओं के साथ मोर पर विराजमान हैं। इसी कारण उन्हें त्रिशुंड मयूरेश्वर गणपति कहा जाता है।
साल में सिर्फ एक दिन ही क्यों खुलता है तळघर ?
मंदिर के गर्भगृह के नीचे दो मंजिला प्राचीन तळघर बना हुआ है।
इस तहखाने से जुड़ी सबसे बड़ी मान्यता यह है कि मंदिर के संस्थापक भीमगिरि गोसावी और उनके शिष्यों ने यहीं बैठकर वर्षों तक साधना की थी। इसी स्थान पर गोसावी संप्रदाय के संतों की समाधियां भी मौजूद हैं।
पूरे वर्ष इस तहखाने में भूजल और मंदिर परिसर का पानी भरा रहता है। गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर पानी निकालकर विशेष सफाई की जाती है, जिसके बाद केवल गुरु पूर्णिमा के दिन श्रद्धालुओं को समाधियों के दर्शन का अवसर मिलता है।
गोसावी परंपरा में गुरु का विशेष महत्व होने के कारण गुरु पूर्णिमा के दिन ही इस स्थान को सार्वजनिक दर्शन के लिए खोला जाता है।
मंदिर की अनोखी वास्तुकला भी करती है आकर्षित
त्रिशुंड गणपति मंदिर अपनी अद्भुत शिल्पकला के लिए भी प्रसिद्ध है। मंदिर की दीवारों पर राजस्थानी, मालवा और दक्षिण भारतीय वास्तुकला का सुंदर संगम दिखाई देता है।
सबसे खास बात यह है कि मंदिर की बाहरी दीवारों पर ब्रिटिश सैनिकों, गैंडे, सिंह और कई पौराणिक दृश्यों की दुर्लभ पत्थर की नक्काशी देखने को मिलती है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग पहचान देती है।
दर्शन का समय
* तारीख- 29 जुलाई 2026 (बुधवार)
* अवसर- गुरु पूर्णिमा
* समय- सुबह ५.00 बजे से रात 10.00 बजे तक
* स्थान- त्रिशुंड मयूरेश्वर गणपति मंदिर, नागझरी पात्र के पास, सोमवार पेठ, पुणे
करीब तीन शताब्दियों की आध्यात्मिक विरासत और रहस्यमयी इतिहास को समेटे यह मंदिर गुरु पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है। यदि आप इस दिन पुणे में हैं, तो साल में केवल एक बार मिलने वाले इस दुर्लभ दर्शन का लाभ अवश्य उठाएं।

