नियमों का पालन करते हुए गणेशोत्सव मनाएं : केंद्रीय राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोळ
पुणे, दि. 28 : गणेशोत्सव महाराष्ट्र के सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। भक्ति, परंपरा और सामाजिक एकता का संदेश देने वाला यह पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता है। हालांकि, उत्सव के कारण किसी भी नागरिक को परेशानी न हो, इसका ध्यान रखना भी जरूरी है। इसलिए कानून और न्यायालय द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करते हुए, ध्वनि प्रदूषण से बचकर तथा नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गणेशोत्सव मनाएं, ऐसा आवाहन केंद्रीय राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोळ ने किया।
गणेशोत्सव की शोभायात्राओं और सार्वजनिक कार्यक्रमों में कर्णकर्कश ध्वनि पैदा करने वाले ‘प्लाज्मा’ और ‘प्रेशर मीड’ जैसे ध्वनि उपकरणों पर पूरी तरह प्रतिबंध होना चाहिए। इस संबंध में मोहोळ ने स्पष्ट भूमिका व्यक्त की।
लेजर लाइट के इस्तेमाल से भी बचने की अपील
मोहोळ ने कहा कि गणेशोत्सव के दौरान लेजर लाइट के इस्तेमाल पर भी गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। लेजर का अनुचित अथवा अनियंत्रित इस्तेमाल नागरिकों की आंखों के साथ-साथ सड़क पर वाहन चलाने वालों की सुरक्षा के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए गणेशोत्सव में लेजर लाइट के इस्तेमाल से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव की भव्यता कर्णकर्कश आवाज, बड़े-बड़े साउंड सिस्टम या खतरनाक रोशनी में नहीं, बल्कि गणराय के प्रति श्रद्धा, परंपराओं के सम्मान और समाज के प्रति जिम्मेदारी में है। इसलिए उत्सव के दौरान ध्वनि प्रदूषण की निर्धारित सीमाओं का पालन करना बेहद जरूरी है।
ढोल-ताशा पर अनावश्यक प्रतिबंध नहीं
केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक ढोल-ताशा गणेशोत्सव की परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। इसलिए पारंपरिक वाद्यों पर अनावश्यक प्रतिबंध लगाने के बजाय कानून द्वारा निर्धारित ध्वनि सीमा और अनुशासन के भीतर उनका इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
डीजे और अन्य ध्वनि प्रणालियों के संबंध में भी उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। इसे सभी के सहयोग और नियमों के दायरे में रहकर मनाया जाना चाहिए।
नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा का रखें ध्यान
मोहोळ ने गणेश मंडलों से अपील करते हुए कहा कि उत्सव का आयोजन करते समय नागरिकों की सुविधा, यातायात, पर्यावरण और सार्वजनिक सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए।
उन्होंने कहा, “उत्साह कायम रखें, लेकिन कर्णकर्कश आवाज और नियमों के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले साधनों पर रोक लगाएं। नियमों का पालन करते हुए पर्यावरणपूरक और अनुशासित तरीके से इस वर्ष का गणेशोत्सव मनाएं।”

