पुणे: शहर के स्वारगेट और मार्केट यार्ड पुलिस थाना क्षेत्रों में एक बार फिर गैंगवार की घटनाएँ सामने आने लगी हैं। रिकॉर्ड पर दर्ज अपराधियों के बीच आपसी विवाद के चलते फायरिंग और हमलों की घटनाएँ बढ़ने लगी हैं, जिससे इलाके में भय का माहौल बन गया है। इन घटनाओं के बाद स्वारगेट पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उभरती गैंगों पर समय रहते सख्त कार्रवाई करना जरूरी है।
कुछ दिन पहले ही नाबालिग लड़कों द्वारा दिनदहाड़े सड़क पर फायरिंग कर दहशत फैलाने की घटना सामने आई थी। इसी घटना का बदला लेने के लिए शुक्रवार (6 मार्च) की देर रात एक बार फिर गोलीबारी की गई। इस हमले में कोंढवा के काकडे वस्ती निवासी **मोझेस मल्लिकार्जुन शेकापुरे** घायल हो गए, जिन्हें पीठ में गोली लगी।
पुलिस के अनुसार, मोझेस शेकापुरे अपने भाई **सागर शेकापुरे** और मित्र **निखिल लगाडे** के साथ महर्षीनगर में आयोजित शिवजयंती उत्सव देखकर दोपहिया वाहन से घर लौट रहे थे। रात करीब 11:20 से 11:30 बजे के बीच वखार महामंडल चौक से गंगाधाम चौक रोड पर बंसिलाल नेमीचंद ओस्तवाल की दुकान के सामने कुछ आरोपियों ने उनका पीछा किया और पिस्तौल से फायरिंग कर दी। इस दौरान मोझेस शेकापुरे घायल हो गए, जबकि आरोपी मौके से फरार हो गए।
इस मामले में सागर शेकापुरे की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। बाद में अपराध शाखा की टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस घटना का मुख्य आरोपी और घायल दोनों ही स्वारगेट पुलिस थाना क्षेत्र के रिकॉर्ड पर दर्ज अपराधी हैं। कुछ ही दिनों के भीतर दो बार फायरिंग की घटनाएँ होने से इलाके के नागरिकों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ महीने पहले भी एक कुख्यात अपराधी पर हमला किया गया था। उस समय हमलावरों ने पिस्तौल तो निकाली थी, लेकिन गोली नहीं चलने के कारण बड़ा हादसा टल गया था। बताया जाता है कि सीसीटीवी फुटेज में हथियार का इस्तेमाल स्पष्ट दिखाई देने के बावजूद उस घटना में पुलिस रिकॉर्ड में पिस्तौल के उपयोग का उल्लेख नहीं किया गया था।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि स्वारगेट और मार्केट यार्ड क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों से अवैध गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है। मटका, जुआ, अवैध शराब और अन्य गैरकानूनी धंधों के फिर से सक्रिय होने की बात कही जा रही है। माना जा रहा है कि इन गतिविधियों के कारण अपराध को बढ़ावा मिल रहा है। सूत्रों के मुताबिक कुछ पुलिस कर्मियों द्वारा इन अवैध धंधों को अप्रत्यक्ष समर्थन मिलने की भी चर्चा है, जिससे अपराधियों का मनोबल बढ़ रहा है और गैंगवार जैसी घटनाएँ सामने आ रही हैं।


