पुणे : साधु वासवानी मिशन द्वारा 18 से 24 फरवरी 2026 के दौरान वार्षिक ‘थैंक्सगिविंग वीक’ का आयोजन अत्यंत उत्साह और सेवा-भाव के साथ किया गया। वर्ष 1998 से निरंतर मनाई जा रही यह परंपरा प्रार्थना, कृतज्ञता और निस्वार्थ मानवीय सेवा को समर्पित है। इस सप्ताह का उद्देश्य कृतज्ञता को केवल भावना तक सीमित न रखते हुए उसे कर्म के रूप में समाज में उतारना था। मिशन की आध्यात्मिक प्रमुख दिदी कृष्णा कुमारी के मार्गदर्शन में सप्ताहभर अनेक सामाजिक उपक्रमों का आयोजन किया गया।
इस दौरान ताराचंद, कमला नेहरू एवं सरदार वल्लभभाई पटेल अस्पतालों में मरीजों के लिए पोषण एवं स्वच्छता से संबंधित सामग्री वितरित की गई।
दिव्यांग सशक्तिकरण के अंतर्गत ‘लिम्ब्स फॉर द लिम्बलेस’ पहल के माध्यम से 42 कृत्रिम अंग वितरित किए गए, जिससे शिशुओं और बच्चों सहित अनेक लाभार्थियों को पुनः चलने-फिरने की क्षमता प्राप्त हुई।
सभा को संबोधित करते हुए दिदी कृष्णा कुमारी ने कहा,“हर परिस्थिति में ‘धन्यवाद, प्रभु’ कहना सीखिए। जब परिस्थितियाँ आपके अनुकूल न हों, तब भी विश्वास रखें कि जो कुछ भी होता है, वह अंततः हमारे कल्याण के लिए ही होता है।”‘थैंक्सगिविंग वीक’ के माध्यम से साधु वासवानी मिशन ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि सच्ची कृतज्ञता सेवा, करुणा और मानवता के कार्यों से ही प्रकट होती है।
शिक्षा क्षेत्र में मुलशी के जिला परिषद स्कूल तथा महात्मा फुले विद्यालय के विद्यार्थियों को स्टेशनरी एवं परीक्षा-आवश्यक सामग्री प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त दृष्टिबाधित व्यक्तियों, ट्रांसजेंडर समुदाय और महिला आश्रम अनाथालय के निवासियों के लिए विशेष सहायता एवं वस्त्र वितरण कार्यक्रम भी संपन्न हुए। इस वर्ष के ‘थैंक्सगिविंग वीक’ की विशेष उपलब्धि दादा वासवानी स्किल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट का सक्रिय योगदान रहा। सेवा कार्यक्रमों में वितरित किए गए अधिकांश कपड़े के बैग संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा हस्तनिर्मित थे। इससे यह संदेश स्पष्ट हुआ कि मिशन की सेवाएँ केवल दान तक सीमित न होकर कौशल विकास और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दे रही हैं।


