‘विरासत से विकास’ के संकल्प के साथ सांस्कृतिक धरोहर को सशक्त बनाने का प्रयास

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हमारी संस्कृति ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति – सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशिष शेलार

 

पुणे ;  “प्रख्यात कथक नृत्यांगना रोहिणी भाटे ने अपना संपूर्ण जीवन कथक साधना को समर्पित कर इस कला को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया। भारतीय शास्त्रीय नृत्य के कलाकार वास्तव में भगवान शिव के साधक होते हैं और हमारी संस्कृति ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। इसी संस्कृति के संवर्धन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘विरासत से विकास’ का संकल्प है,” यह विचार राज्य के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशिष शेलार ने व्यक्त किए। पुणे में आयोजित ‘पंडिता रोहिणी भाटे नृत्य महोत्सव’ को पुणेकरों का जबरदस्त प्रतिसाद मिला। ‘वंदे मातरम्’ गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर कोथरुड में 750 से अधिक शास्त्रीय नृत्यांगनाओं ने एक साथ प्रस्तुति देकर अद्वितीय सांस्कृतिक सम्मान अर्पित किया।

इस अवसर पर राज्य के उच्च एवं तंत्र शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील, महापौर मंजुषा नागपुरे, प्रसिद्ध नृत्यगुरु शमा भाटे, मनीषा साठे, सुचेता चापेकर, महोत्सव के मुख्य संयोजक पुनीत जोशी और अजय धोंगडे सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहे। इस अवसर पर चंद्रकांत पाटील ने कहा कि “स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव की भावना से शुरू हुआ यह आयोजन आज एक नई ऊंचाई पर पहुंच चुका है। भारत ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सहेजकर रखा है, इसी कारण आज विश्व भारत को ‘विश्वगुरु’ के रूप में देख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में राज्य में सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं।”

 

 

महापौर मंजुषा नागपुरे ने कहा कि पुणे केवल शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि कलाकारों की जन्मभूमि भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि महानगरपालिका शहर की सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।

महोत्सव में देश के विभिन्न हिस्सों से आई नृत्यांगनाओं ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजनों से शास्त्रीय नृत्य को नई ऊर्जा मिलती है। साथ ही प्रस्तावित ‘नृत्यगृह’ भविष्य में नृत्य साधकों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र साबित होगा।

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