मध्य रेल की सबसे प्रतिष्ठित और लोकप्रिय ट्रेनों में से एक डेक्कन क्वीन ने 1 जून 2026 को अपनी सेवा के गौरवशाली 97वें वर्ष में प्रवेश किया। इस अवसर पर इस ट्रेन ने अपने सम्मानित यात्रियों की सेवा के 96 वर्ष पूर्ण किए।
1 जून 1930 को महाराष्ट्र के दो प्रमुख शहरों मुंबई और पुणे के बीच शुरू की गई यह ट्रेन ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे (GIPR), जो आगे चलकर मध्य रेल बनी, के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर थी।
यह रेलवे द्वारा शुरू की गई पहली डीलक्स ट्रेन थी, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के दो महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ना था। इसी कारण इसका नाम “डेक्कन क्वीन” अथवा “दक्कन की रानी” रखा गया।
डेक्कन क्वीन की वर्षगांठ का उत्सव पुणे स्टेशन पर प्रातःकाल 12124 पुणे–मुंबई डेक्कन क्वीन के प्रस्थान के समय तथा सायंकाल छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) पर 12123 मुंबई–पुणे डेक्कन क्वीन के प्रस्थान के समय बड़े उत्साह एवं भव्यता के साथ मनाया गया। आकर्षक पुष्प सज्जा से सुसज्जित ट्रेन में यात्रियों, रेल अधिकारियों तथा रेल प्रेमियों की उपस्थिति में केक काटकर इस ऐतिहासिक उपलब्धि का उत्सव मनाया गया।
इस वर्ष डेक्कन क्वीन में यात्री सुविधाओं के उन्नयन हेतु व्यापक नवीनीकरण एवं आधुनिकीकरण कार्य किए गए, जिनमें शामिल हैं—
* भोजनयान (डाइनिंग कार) का नवीनीकरण, जिसमें इसकी विरासतपूर्ण पहचान को बनाए रखते हुए आधुनिक फर्नीचर तथा उन्नत आंतरिक सज्जा प्रदान की गई, ताकि यात्रियों को बेहतर भोजन अनुभव मिल सके।
* शौचालयों का उन्नयन, जिसमें विनाइल फ्लोरिंग, ड्यूरो-वाइप मैट तथा साबुन एवं टिश्यू डिस्पेंसर जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं।
* * कोचों के आंतरिक भागों, छत तथा पैनल बोर्डों को आकर्षक एवं जीवंत थीम के साथ पुनः डिज़ाइन किया गया।
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27 मार्च 2026 को छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस में ट्रेन महोत्सव के अंतर्गत एक विशेष समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में यात्रियों, रेलवे अधिकारियों, रेल प्रेमियों तथा आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर वर्ष 1930 में ट्रेन के शुभारंभ से लेकर अब तक की उसकी गौरवशाली यात्रा को दर्शाने वाली एक आकर्षक ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति भी प्रदर्शित की गई।
अब तक की यात्रा
* डेक्कन क्वीन की शुरुआत दो रेकों के साथ की गई थी, जिनमें प्रत्येक में 7-7 कोच थे। इनमें से एक रेक सिल्वर रंग के साथ स्कारलेट मोल्डिंग से सुसज्जित थी, जबकि दूसरी रेक रॉयल ब्लू रंग में गोल्डन धारियों के साथ तैयार की गई थी।
* मूल रेकों के कोचों के अंडरफ्रेम इंग्लैंड में निर्मित किए गए थे, जबकि कोच बॉडी का निर्माण जीआईपी रेलवे की माटुंगा कार्यशाला में किया गया था।
* वर्ष 1966 में मूल रेकों के कोचों को इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, पेरंबूर द्वारा निर्मित एंटी-टेलीस्कोपिक स्टील बॉडी वाले इंटीग्रल कोचों से प्रतिस्थापित किया गया।
* कोचों की संख्या 7 से बढ़ाकर 12 कर दी गई।
* वर्ष 1995 में पुराने रेकों के स्थान पर नए एयर-ब्रेक रेक लगाए गए।
* 15 अगस्त 2021 से मुंबई–पुणे डेक्कन क्वीन में एक विस्टाडोम कोच जोड़ा गया। इससे यात्रियों को पश्चिमी घाट के मनोहारी एवं रमणीय प्राकृतिक दृश्यों का अवलोकन करने का सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ।
* जून 2022 में डेक्कन क्वीन एक्सप्रेस के सभी पारंपरिक (कन्वेंशनल) कोचों को एलएचबी कोचों से बदल दिया गया। इन कोचों में एलईडी प्रकाश व्यवस्था, बायो-टॉयलेट, ब्रेल संकेतक आदि आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
* वर्तमान में यह ट्रेन 16 कोचों के संशोधित संयोजन के साथ संचालित होती है, जिसमें 4 एसी चेयर कार, 8 द्वितीय श्रेणी चेयर कार, 1 विस्टाडोम कोच, 1 डाइनिंग कार, 1 सामान्य द्वितीय श्रेणी सह गार्ड ब्रेक वैन तथा 1 जनरेटर कार शामिल हैं।

भारत में पहली बार
डेक्कन क्वीन के नाम कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ दर्ज हैं—
• रोलर बेयरिंग वाले कोचों का पहली बार परिचालन।
• एंड-ऑन जनरेशन कोचों के स्थान पर 110 वोल्ट प्रणाली वाले सेल्फ-जनरेटिंग कोचों का पहली बार उपयोग।
• प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी चेयर कारों की शुरुआत पहली बार।
विशिष्ट विशेषता – डाइनिंग कार वाली एकमात्र ट्रेन
डेक्कन क्वीन वर्तमान में भारत की एकमात्र चलने वाली ट्रेन है जिसमें डाइनिंग कार की सुविधा उपलब्ध है। इसमें यात्रियों को टेबल सर्विस प्रदान की जाती है तथा आधुनिक पेंट्री सुविधाएँ जैसे माइक्रोवेव ओवन, डीप फ्रीजर और टोस्टर उपलब्ध हैं। डाइनिंग कार को आरामदायक कुर्सियों और कार्पेट से आकर्षक ढंग से सजाया गया है।
“दक्कन की रानी” का इतिहास वास्तव में दो शहरों की कहानी है। मुंबई और पुणे के नागरिक इस ट्रेन की समयपालन (समय पर प्रस्थान और आगमन) की उत्कृष्ट परंपरा से सदैव संतुष्ट रहे हैं। पिछले 96 वर्षों में यह ट्रेन केवल एक परिवहन साधन नहीं रही, बल्कि पीढ़ियों से जुड़े वफादार यात्रियों को जोड़ने वाली एक संस्था बन चुकी है।
डेक्कन क्वीन का संचालन उसी तिथी को होता है जिस दिन ऐतिहासिक पंजाब मेल का संचालन शुरू हुआ था, जिसकी पहली यात्रा (संचालन)भी 1 जून को सीएसएमटी में मनाया जाता है।


