पुणे। श्रमिक आंदोलन के प्रखर नेता, असंगठित मजदूरों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. बाबा आढाव के निधन से सामाजिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है। 95 वर्ष की आयु में पंचतत्व में विलीन हुए डॉ. आढाव का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
गोवा मुक्ति आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले डॉ. आढाव ने ‘एक गांव एक पाणवठा’ जैसे आंदोलनों से समाज में समानता का संदेश दिया। विभिन्न सत्याग्रहों के दौरान उन्हें 52 बार जेल जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और संघर्ष का रास्ता नहीं छोड़ा।
हमाल, रिक्शाचालक, बांधकाम मजदूर, पथारी व्यापारियों तथा असंगठित श्रमिकों को संगठित कर उन्हें सम्मानजनक हक दिलाने के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। श्रमिक आंदोलनों को नई दिशा देने में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
उनके निधन की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में नागरिक, मजदूर संघों के कार्यकर्ता, सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी तथा विभिन्न क्षेत्र के प्रतिनिधि उपस्थित होकर डॉ. बाबा आढाव को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते रहे। समाज ने एक दृढ़, निस्वार्थ और संघर्षशील व्यक्तित्व खो दिया है


