आदिपेक्स 2026 प्रदर्शनी में 27 पिक्चोरियल पोस्टकार्ड और विशेष कवर का विमोचन

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फिलाटेलिक जगत में नया कीर्तिमान स्थापित

कुम्हारी (छत्तीसगढ़) : जैनिज़्म फिलाटेलिक सोसाइटी (जेपीएस) के छठे राष्ट्रीय अधिवेशन के अवसर पर 17 जनवरी को छत्तीसगढ़ के कुम्हारी स्थित कैवल्यधाम तीर्थ में आयोजित आदिपेक्स 2026 फिलैटेलिक प्रदर्शनी के दौरान एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई। इस अवसर पर भारतीय डाक विभाग द्वारा कुल 27 पिक्चोरियल पोस्टकार्ड तथा एक विशेष कवर का भव्य रूप से विमोचन किया गया, जिससेफिलाटेलिक जगत में नया कीर्तिमान स्थापित हुआ।
इस प्रदर्शनी के दौरान जारी किए गए 27 पिक्चोरियल पोस्टकार्डों पर 27 अलग-अलग विशेष कैंसलेशन (मुहरें) लगाई गईं। इन सभी पोस्टकार्डों को समारोहपूर्वक ई-रिक्शा के माध्यम से कुम्हारी से रायपुर जीपीओ तक ले जाया गया, जिसने इस आयोजन को एक विशिष्ट और स्मरणीय स्वरूप प्रदान किया।


इसके साथ ही कैवल्यधाम तीर्थ को दर्शाने वाला एक विशेष कवर भी विशिष्ट मुहर के साथ जारी किया गया। यह समस्त फिलैटेलिक सामग्री रायपुर परिक्षेत्र के एसएसपी द्वारा जेपीएस के संस्थापक सुधीर जैन (सतना), राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप जैन (बालोद), उपाध्यक्ष महावीर कुंदूर (हुबली) एवं प्रमोद कुमार जैन (पुदुच्चेरी), सचिव मीठालाल जैन (पुणे), समन्वयक श्री तेजकरण जैन (राजनांदगांव) तथा प्रदर्शनी संयोजक अतुल जैन (बिलासपुर) और श्री अंकित अग्रवाल (रायपुर) की गरिमामयी उपस्थिति में जारी की गई।

इस अवसर जेपीएस के संस्थापक संरक्षक सुधीर जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में देश के 14 राज्यों से सदस्य शामिल हुए। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय डाक विभाग द्वारा जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों के चित्रों वाले 24 पिक्चोरियल पोस्टकार्ड जारी किए गए, जिनमें प्रत्येक पर 24 अलग-अलग विशेष मुहरें अंकित थीं। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ के प्रमुख जैन तीर्थस्थलों—कैवल्यधाम, नगपुरा और चंद्रगिरि—पर आधारित तीन विशेष पिक्चोरियल पोस्टकार्ड भी जारी किए गए।

श्री सुधीर जैन, जो फिलैटेलिक कांग्रेस ऑफ इंडिया की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य एवं सेंट्रल इंडिया फिलैटेलिक सोसाइटी के अध्यक्ष भी हैं, ने बताया कि एक ही दिन और एक ही स्थान पर 27 अलग-अलग पिक्चोरियल पोस्टकार्ड, 27 विशिष्ट विशेष मुहरों के साथ तथा एक विशेष कवर का विमोचन संभवतः विश्व रिकॉर्ड है। यह उपलब्धि भारतीय फिलैटेलिक इतिहास में एक अभूतपूर्व और गौरवशाली अध्याय के रूप में दर्ज की जाएगी।

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