पुणे, महाराष्ट्र: पुणे जिले के भोर और वेल्हे (राजगढ़) क्षेत्रों में सायबेजआशा (CybageAsha) पैडी कप (Paddy Cup) का सफल आयोजन और समापन हुआ। इस पहल के माध्यम से सायबेज फाउंडेशन (Cybage Foundation) ने बेहतर खेती की पद्धतियों, गांवों की एकता और लोगों की भागीदारी को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों को आगे बढ़ाया। इस कार्यक्रम में हजारों किसानों और उनके परिवारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह आयोजन खेती, सहयोग और सामूहिक विकास का एक बड़ा उत्सव बन गया।
समापन अवसर पर आयोजित सायबेजआशा किसान क्रिकेट टूर्नामेंट कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। यह सिर्फ खेल प्रतियोगिता नहीं थी, बल्कि गांवों के लोगों को एक साथ लाने, आपसी संबंध मजबूत करने और सहयोग की भावना बढ़ाने का माध्यम भी बना। इस वर्ष प्रतियोगिता में 35 पुरुष टीमों और 40 महिला टीमों ने भाग लिया। इससे यह साफ दिखाई दिया कि खेल गांवों में एकता और सामाजिक मेलजोल बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस पहल की एक बड़ी विशेषता महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही। सायबेज संपदा परियोजना, जो महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित है, के अंतर्गत महिला किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। क्रिकेट टूर्नामेंट और खेती की गतिविधियों में भाग लेकर महिलाओं ने नेतृत्व की भूमिका निभाई, पुराने विचारों को बदला और अपने गांवों में आत्मविश्वास और पहचान हासिल की।
सायबेज फाउंडेशन की प्रमुख रितू नथानी ने कहा, “सायबेजआशा पैडी कप और किसान क्रिकेट टूर्नामेंट हमारे काम की असली भावना को दर्शाते हैं। यह सिर्फ ट्रॉफी या अंक जीतने के बारे में नहीं है, बल्कि लोगों को आगे बढ़ने का अवसर देने के बारे में है। जब लोग साथ मिलकर सीखते हैं, खेलते हैं और जश्न मनाते हैं, तो एक साधारण पहल भी लंबे समय तक सकारात्मक बदलाव ला सकती है।”
पैडी कप केवल एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि मई से दिसंबर तक चलने वाली एक लंबी सीखने की प्रक्रिया है। इस दौरान किसानों को आसान, कम खर्च वाली और वैज्ञानिक धान खेती की विधियाँ अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। किसान दस-दस के समूहों में मिलकर काम करते हैं, जिससे वे एक-दूसरे से सीखते हैं, जिम्मेदारी साझा करते हैं और समस्याओं का समाधान मिलकर करते हैं। इससे खेती के साथ-साथ गांवों में एकता भी मजबूत होती है।
पूरे खेती के मौसम में सायबेजआशा की विशेषज्ञ टीम खेतों में जाकर किसानों को सीधा मार्गदर्शन देती है। इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य खेती में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की लागत और मेहनत कम करना, पैदावार बढ़ाना और किसानों की आय में सुधार करना है। सामूहिक खरीद से खर्च कम होता है और आपसी सहयोग भी बढ़ता है।
किसान तय किए गए चरणों का पालन करते हैं, जिससे खेती में अनुशासन और समानता बनी रहती है। प्रत्येक समूह 21 संरचित खेती चरणों का पालन करता है, जिससे खेती में अनुशासन और एकरूपता सुनिश्चित होती है। व्हाट्सऐप समूहों के जरिए किसान और विशेषज्ञ लगातार जुड़े रहते हैं। इससे समय पर सलाह, जानकारी और सहायता मिलती रहती है। इस तरह पारंपरिक अनुभव और आधुनिक जानकारी का अच्छा मेल बनता है।
2025–26 के सायबेजआशा पैडी कप में 4,500 से अधिक किसानों और उनके परिवारों ने भाग लिया, जो इस पहल पर बढ़ते विश्वास और इसकी विश्वसनीयता को दर्शाता है। कार्यक्रम में प्रत्येक समूह के लिए 500 अंकों तक की पारदर्शी मूल्यांकन प्रणाली अपनाई गई, और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों को वित्तीय प्रोत्साहन देकर सतत सुधार की संस्कृति को प्रोत्साहित किया गया।
2023 में शुरू हुई यह पहल इस सरल विश्वास पर आधारित है कि जब किसानों को सही जानकारी, भरोसा और सामूहिक सहयोग मिलता है, तो वे मिलकर स्थायी और सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। यह पहल बेहतर खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण समाज को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


