60 वर्षीय महिला किसान के अवयव दान से चार लोगों को मिला नया जीवन

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पुणे,१२  फरवरी2026 : सड़क दुर्घटना के बाद ब्रेन डेड घोषित की गई पुरंदर की 60 वर्षीय महिला किसान के अवयव दान  से चार लोगों को नया जीवन मिला है.  6 फरवरी को सड़क दुर्घटना में सिर पर गंभीर चोट लगने के बाद उस महिला को  नोबल हॉस्पिटल्स ॲन्ड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया था.  वह अपने पति के साथ दोपहिया वाहन पर सफर कर रही थीं.  दुर्घटना में दोनों को ही मस्तिष्क पर गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा.

8 फरवरी को उन्हें  ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद उनके परिवार ने  अवयव दान के लिए सहमति दी और 9 फरवरी को अवयव दान  की प्रक्रिया संपन्न की गई.

नोबल हॉस्पिटल्स ॲन्ड रिसर्च सेंटर के समूह कार्यकारी अधिकारी डॉ.संजय पठारे ने कहा की, परिवार की सहमति मिलने के बाद उनके अवयव  निकाले गए.  फेफड़े यह प्रत्यारोपण के लिए पुणे के एक अन्य अस्पताल भेजे गए.  एक किडनी नासिक के अस्पताल भेजी गई, जबकि दूसरी किडनी और यकृत (लीवर) का प्रत्यारोपण 9 फरवरी को नोबल हॉस्पिटल्स एंड रिसर्च सेंटर में किया गया.

यकृत का प्रत्यारोपण दीर्घकालीन  यकृत बीमारी से पीड़ित 45 वर्षीय मरीज पर किया गया.  वहीं किडनी का प्रत्यारोपण दीर्घकालीन  मुत्रपिंड बीमारी रोग से ग्रस्त 35 वर्षीय मरीज पर किया गया.

डॉ. पठारे ने  अवयव दान प्रक्रिया में समन्वय और महत्वपूर्ण योगदान के लिए ज़ेडटीसीसी का आभार व्यक्त किया.

इस महिला किसान के पति की हालत गंभीर है और उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया है.

मुत्रपिंड प्रत्यारोपण टीम में नोबल हॉस्पिटल्स ॲन्ड रिसर्च सेंटर के रीनल सायन्सेस विभाग प्रमुख डॉ.शशिकांत भांगे,  भूलतज्ञ डॉ.गीतांजली आखाडे व टीम इनका समावेश था.यकृत प्रत्यारोपण टीम में यकृत प्रत्यारोपण शल्यचिकित्सक डॉ.बिपिन विभूते और डॉ.स्मिता पारख,साथ ही भूलतज्ञ डॉ.मनीष पाठक और प्रत्यारोपण समन्वयक महेश तुपे व आश्विनी कवडे इनका समावेश था.

नोबल हॉस्पिटल्स ॲन्ड रिसर्च सेंटर के संचालक डॉ.दिविज माने ने कहा की, ऐसी कठिन परिस्थिति में उनके बेटे और बेटी ने अवयव दान  के लिए सहमति दी. इस अवयव दान  से प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों और उनके परिवारों में नई आशा निर्माण हुई है.

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