गले के कैंसर से पिडीत ७४ वर्षीय मरीज को वापस मिली आवाज

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ऑन्को लाईफ कैंसर सेंटर में हुआ इलाज

*पुणे* – गले के कैंसर से जुझ रहे एक ७४ वर्षीय मरीज की जान बचाने में ऑन्को लाईफ कैंसर सेंटर के डॉक्टरों को सफलता हासिल हुई हैं। कैंसर के कारण उनकी आवाज़ चली गई थी। लेकिन समय पर जांच और इलाज होने के कारण मरीज को नई जिंदगी के साथ साथ उनकी आवाज भी फिर से वापस मिली हैं। तलेगाव दाभाडे में स्थित ऑन्को लाईफ कैंसर सेंटर में इस मरीज का इलाज हुआ है। प्रिसीजन ऑन्कोलॉजी तकनीक से उनका इलाज किया गया है।
 पिंपरी-चिंचवड़ में रहनेवाले जनार्दन उमाले,* पहले तंबाकू का सेवन करते थे, लेकिन इसके अलावा उन्हें कोई बड़ी बीमारी नहीं थी। कुछ समय पहले उन्होंने महसूस किया कि उनकी आवाज़ धीरे-धीरे भारी और बैठी हुई लगने लगी है। साथ ही गर्दन के दाहिने हिस्से में बिना दर्द की सूजन भी दिखने लगी। करीब तीन महीने के अंदर उनकी आवाज़ इतनी कमजोर हो गई कि ज़ोर से बोलना मुश्किल हो गया। छोटी-छोटी बातें करना भी उन्हें थका देने लगा। इसी वजह से वे लोगों से मिलना-जुलना कम करने लगे। मरीज जनार्दन उमाले ने कहॉं की , “मैंने अपने घरवालों से भी कम बोलना शुरू कर दिया था। मुझे लगने लगा था कि मैं अभी पहले की तरह जिंदगी नहीं जी सकता।
डर, चिंता और अकेलेपन के कारण आखिरकार उन्होंने डॉक्टर से मिलने का फैसला किया। जब वे अस्पताल पहुंचे, तो जांच के बाद पता चला कि उन्हें स्टेज 4A गले का कैंसर है। पेट-सीटीस्कॅन जांच में यह सामने आया कि कैंसर गले के एक हिस्से से वोकल कॉर्ड्स तक फैल चुका है और पास की ग्रंथियां (लिम्फ नोड्स) भी प्रभावित हैं। हालांकि राहत की बात यह थी कि कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैला था। इसी वजह से डॉक्टरों ने ऐसा इलाज चुना, जिससे बीमारी भी ठीक हो जाए और बोलने की क्षमता भी बची रहे।
*ऑन्को लाईफ कैंसर सेंटर के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के निदेशक डॉ. गौरव जसवाल ने कहा कि* ,  विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम ने मिलकर इलाज की योजना बनाई। मरीज को कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी एक साथ दी गई। इलाज के दौरान आधुनिक हेलिकल टोमोथेरेपी तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे कैंसर पर सटीक असर पड़ा और आसपास के जरूरी अंग सुरक्षित रहे। इलाज खत्म होने के करीब १६ हफ्तों बाद मरीज की आवाज़ में साफ़ सुधार दिखने लगा। उनकी आवाज़ पहले से ज्यादा साफ़ और मजबूत हो गई। गर्दन की सूजन पूरी तरह खत्म हो गई और जांच में कैंसर के कोई लक्षण नहीं मिले। फॉलो-अप में भी मरीज पूरी तरह ठीक पाया गया और अब वे आराम से बोल पा रहे हैं।
*डॉ. जसवाल ने आगे कहा कि,* अगर इलाज में देरी होती, तो मरीज की आवाज़ हमेशा के लिए जा सकती थी। उन्हें निगलने में गंभीर दिक्कत, सांस लेने में परेशानी और जीवन की गुणवत्ता में भारी गिरावट कासामना करना पड़ सकता था। इलाज के बाद मरीज को कुछ सावधानियाँ भी बताई गईं। जैसे नरम और गीला खाना खाना, धीरे-धीरे और ध्यान से निगलना, मुंह की साफ सफाई का ध्यान रखना, बहुत तीखा या सख्त खाना न खाना, गर्दन और जबड़े के हल्के व्यायाम करना, धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूर रहना, वजन संतुलित रखना, खूब पानी पीना, हल्की शारीरिक गतिविधि करना और समय-समय पर डॉक्टर को दिखाते रहना।
*मरीज श्री जनार्दन उमाळे ने कहॉं,* “मुझे सच में लगा था कि मैं फिर कभी ठीक से बोलनहीं पाऊंगा। आज मैं बहुत खुश हूं कि मैं अपने परिवार और दोस्तों के साथ पहले की तरह बात कर सकता हूं। ऐसा लगता है, जैसे मुझे मेरी ज़िंदगी का एक बहुत अहम हिस्सा वापस मिल गया है। मेरी आवाज वापर लौटाकर मुझे नई जिंदगी देने के लिए में डॉक्टरों का आभारी हूं।”

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