छात्रों के बीच साइबर जागरूकता लगभग 90% तक पहुँची कुल प्रभाव 80 लाख से अधिक जीवनों तक पहुँचा
- क्विक हील फाउंडेशन ने अपना पहला इम्पैक्ट असेसमेंट (प्रभाव मूल्यांकन) “साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा: फ्यूचर प्रूफ 2025-26” जारी किया। यह रिपोर्ट 10.4 लाख छात्रों के सर्वे पर आधारित है, जिसमें 32 जिलों के 2.18 लाख उत्तरदाताओं का विस्तार से विश्लेषण किया गया है।
पुणे, 26 मार्च 2026: ग्लोबल साइबर सुरक्षा समाधान प्रदाता कंपनी, क्विक हील टेक्नोलॉजीज लिमिटेड की सीएसआर शाखा, क्विक हील फाउंडेशन ने आज मीडिया से एक विशेष बातचीत में “साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा: फ्यूचर प्रूफ 2025–26” रिपोर्ट पेश की।यह रिपोर्ट 28 मार्च को पुणे में होने वाले “साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा अवॉर्ड्स” से ठीक पहले जारी की गई है। इस रिपोर्ट में फाउंडेशन के प्रमुख साइबर जागरूकता कार्यक्रम के पहले बड़े प्रभाव मूल्यांकन के परिणाम बताए गए हैं।
‘साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा’ सर्वे में महाराष्ट्र और कर्नाटक के 10.4 लाख छात्रों को शामिल किया गया, जिनसे ट्रेनिंग से पहले और बाद में सवाल पूछे गए थे। इनमें से 2,18,221 छात्रों का एक ठोस सांख्यिकीय नमूना लेकर उनका विस्तृत विश्लेषण किया गया। यह रिपोर्ट इस बात के सबूत पेश करती है कि कैसे सही तरीके से दी गई साइबर ट्रेनिंग अलग-अलग उम्र के छात्रों के ज्ञान, उनके दृष्टिकोण और इंटरनेट उपयोग करने के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव ला रही है।
डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि पर आधारित, साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा कार्यक्रम युवा विकास पर केंद्रित है। यह युवाओं में साइबर जागरूकता बढ़ाने, डिजिटल कौशल विकसित करने और ऑनलाइन जिम्मेदार व्यवहार को प्रोत्साहित करने पर जोर देता है। यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों 4, 5, 8, 9 और 17 के साथ जुड़ी हुई है, जिससे भारत भर के युवाओं में डिजिटल साक्षरता की खाई को कम करने में मदद मिल रही है।
समीक्षा अवधि के दौरान, इस कार्यक्रम ने 36 शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर 32 जिलों में 5,169 विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए। क्विक हील फाउंडेशन के व्यापक साइबर सुरक्षा प्रयासों ने पूरे भारत में 80 लाख से अधिक लोगों के जीवन को छुआ है।
‘साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा’ सर्वे से पता चलता है कि कार्यक्रम के बाद प्रमुख साइबर सुरक्षा अवधारणाओं पर जागरूकता का स्तर अब 90% के करीब है, जो यह दर्शाता है कि सत्रों में भाग लेने के बाद छात्र सुरक्षित और असुरक्षित डिजिटल प्रथाओं के बीच अंतर करने के लिए काफी बेहतर ढंग से सुसज्जित हैं। जागरूकता का स्तर कक्षा 5-7 के छात्रों में 43% से बढ़कर 89%, कक्षा 8-10 के छात्रों में 49% से बढ़कर 90% और कॉलेज के छात्रों में 43% से बढ़कर 90% हो गया है। 10 में से 8 छात्रों ने सत्रों के बाद सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार अपनाने का स्पष्ट संकल्प व्यक्त किया। शुरुआती व्यवहारिक बदलाव भी देखे गए, जहां संबंधित समूहों में सुरक्षित डिजिटल प्रथाएं 39% से बढ़कर 84%, 39% से बढ़कर 82% और 26% से बढ़कर 89% हो गईं। इसके बाद, प्रतिभागियों के बीच डिजिटल दृढ़ता भी बेहतर हुई, जो संबंधित समूहों में क्रमशः 9% से 86%, 68% से 91% और 73% से 91% तक पहुंच गया।
सुश्री अनुपमा काटकर, चेयरपर्सन, क्विक हील फाउंडेशन और चीफ – ऑपरेशनल एक्सीलेंस, क्विक हील टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने कहा, “मुझे यह बताते हुए अत्यंत खुशी हो रही है कि ‘साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा’ के माध्यम से, हम पहली बार केवल पहुँच के आंकड़ों से आगे बढ़कर उस बदलाव की गहराई को समझ पाए हैं जो हम समाज में ला रहे हैं। सर्वे के नतीजे मेरा यह विश्वास और पक्का करते हैं कि भविष्य डिजिटल रूप से सशक्त युवाओं का है। 80 लाख से अधिक युवाओं के जीवन को छूना हमारे लिए केवल एक उपलब्धि नहीं है; बल्कि यह इस बात का संकेत है कि भारत के युवा एक ‘सुरक्षित डिजिटल भारत’ की रक्षा के लिए पहली दीवार बनने को तत्पर हैं।
यह हमें और भी बड़ा सोचने और मेहनत करने के लिए प्रेरित करता है, ताकि हमारा यह सपना पूरा हो सके जहाँ हर जिले का हर बच्चा न केवल जागरूक हो, बल्कि ऑनलाइन दुनिया के खतरों से निपटने के लिए पूरी तरह तत्पर और सुदृढ़ भी हो। मैं अपने सभी पार्टनर्स, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी अधिकारियों का हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ जो इस यात्रा में हमारे साथ रहे हैं।”
‘साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा’ कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और समाज के बीच डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह कार्यक्रम छात्रों को ‘साइबर वॉरियर्स’ बनने के लिए प्रेरित करता है। इसके ‘अर्न एंड लर्न’ मॉडल के जरिए छात्र अपनी पढ़ाई का व्यय खुद उठाने के साथ-साथ स्कूलों, कॉलेजों और समुदायों में साइबर जागरूकता फैलाते हैं। तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ, छात्र यहाँ नेतृत्व, बातचीत की कला, टीम वर्क और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट जैसे आवश्यक जीवन कौशल भी सीखते हैं, जिससे वे एक उत्तरदायी डिजिटल नागरिक के रूप में विकसित होते हैं।
साइबर जागरूकता के अलावा, क्विक हील फाउंडेशन अपने सीएसआर प्रयासों को और सुदृढ़ बना रहा है। फाउंडेशन की ‘आरोग्य यान’ जैसी पहल एक मोबाइल मेडिकल वैन के जरिए कई राज्यों के पिछड़े ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक आधारभूत स्वास्थ्य सेवा पहुंचाई है। कोविड-19 के दौरान, फाउंडेशन ने ‘आरोग्यम मनसंपदा’ कार्यक्रम भी चलाया, जिसमें छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया गया। इन प्रयासों के जरिए फाउंडेशन ने देशभर के अभावग्रस्त और आदिवासी समुदायों की हर संभव सहायता की है।


