पुणे : केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिलने वाली है। इस अभियान से राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, ऐसी जानकारी राज्यसभा सांसद डॉ. मेधा कुलकर्णी ने पत्रकार परिषद में दी।
उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के समर्थन में भारतीय जनता पार्टी द्वारा देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत 15 और 16 अप्रैल को प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में पदयात्रा, संवाद कार्यक्रम और महिला सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इस अवसर पर नगरसेविका निवेदिता एकबोटे और प्रियंका शेंडगे-शिंदे भी उपस्थित थीं।
डॉ. कुलकर्णी ने कहा कि सितंबर 2023 में संसद द्वारा पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला ऐतिहासिक कानून है। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण का प्रावधान किया गया है, जिससे महिलाओं की भागीदारी केवल मतदान तक सीमित न रहकर नीति-निर्माण में भी बढ़ेगी।
उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक शोध बताते हैं कि महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक भागीदारी बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। भारत में पिछले दशक में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं प्रभावी रूप से लागू की गई हैं, जिनसे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।
राजनीतिक भागीदारी पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि 2024 के चुनावों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 65.78 तक पहुंच गया है, जो कई स्थानों पर पुरुषों से भी अधिक है। हालांकि, संसद और विधानसभाओं में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में 1952 में केवल 22 महिलाएं थीं, जो अब बढ़कर 75 हो गई हैं, लेकिन यह संख्या अभी भी पर्याप्त नहीं है।


