मुंबई, 20 अप्रैल 2026: भारत के बिजनेस लीडर्स भले ही बोर्डरूम में AI को बढ़ावा दे रहे हों, लेकिन ग्राहकों तक उसका असर अभी पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है। यह बात सर्विसनाउ की कस्टमर एक्सपीरियंस रिपोर्ट 2026, द सीएक्स शिफ्ट, में सामने आई है, जिसमें देश के ग्राहकों, सर्विस प्रतिनिधियों और लीडर्स की राय शामिल है।
बिजनेस लीडर्स ग्राहक अनुभव में AI को तेजी से प्राथमिकता दे रहे हैं, लेकिन कंपनियों के निवेश और ग्राहकों की असली जरूरतों के बीच एक बड़ा अंतर बना हुआ है। यह 2026 में एक चुनौती भी है और साथ ही बड़ा अवसर भी।
इरादा मजबूत, लेकिन अमल कमजोर
भारतीय लीडर्स अपनी योजनाओं को निवेश के जरिए आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर असर अभी सीमित है। रिपोर्ट के मुताबिक, 60% लीडर्स का कहना है कि अगले तीन सालों में उनकी कंपनियां बेहतर ग्राहक अनुभव के लिए कनेक्टेड एंटरप्राइज अप्रोच अपनाएंगी। वहीं, 81% कंपनियां ग्राहक डेटा को एक जगह लाकर सिंगल व्यू बनाने की तैयारी में हैं और 69% कंपनियां सेल्स और सर्विस में यूनिफाइड ओम्नीचैनल CRM को बेहतर करने की योजना बना रही हैं। हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती है कि सिर्फ ज्यादा निवेश करना ही काफी नहीं है—जरूरी यह है कि निवेश सही दिशा में हो, तभी उसका असली फायदा ग्राहकों तक पहुंच पाएगा।
सर्विसनाउ इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर सुमीत माथुर ने कहा, “भारतीय बोर्डरूम में महत्वाकांक्षा साफ दिखाई देती है—हर बातचीत में यह नजर आती है। लीडर्स एआई को तेजी से अपनाना चाहते हैं और निवेश करने की भी पूरी इच्छा है। लेकिन मजबूत और जुड़े हुए आधार के बिना यह महत्वाकांक्षा सिर्फ शोर बनकर रह जाती है, जिसे ग्राहक धीरे-धीरे नजरअंदाज करने लगते हैं। आगे वही कंपनियां निकलेंगी, जो सिर्फ नए प्लेटफॉर्म्स को परखने में समय नहीं लगातीं, बल्कि मूल्यांकन से आगे बढ़कर असली काम शुरू करती हैं।”
लीडर्स गलत समस्याओं पर फोकस कर रहे हैं
भारतीय बिजनेस लीडर्स और ग्राहकों के बीच सोच का अंतर साफ नजर आता है। जहां 53% ग्राहक प्रक्रियाओं और नीतियों को लेकर साफ जानकारी न मिलने को अपनी सबसे बड़ी परेशानी बताते हैं, वहीं सिर्फ 22% लीडर्स ही इसे गंभीर समस्या मानते हैं। इसी तरह, 48% ग्राहकों का कहना है कि उन्हें ग्राहक अनुभव में सहानुभूति की कमी महसूस होती है, लेकिन केवल 19% लीडर्स ही इसे प्राथमिकता वाली चिंता मानते हैं।
यह तालमेल की कमी दूसरे पहलुओं में भी साफ दिखती है। 45% ग्राहक बार-बार अलग-अलग विभागों में ट्रांसफर किए जाने से परेशान हैं, जबकि केवल 23% लीडर्स ही इसे समस्या मानते हैं। इसी तरह, 37% ग्राहक हर बार एजेंट को वही जानकारी दोहराने से नाराज़ होते हैं, लेकिन सिर्फ 25% लीडर्स इससे सहमत हैं। ये अंतर मामूली नहीं हैं। इनके कारण कंपनियां गलत समस्याओं पर समाधान बनाती हैं, जबकि ग्राहकों की असली और बड़ी परेशानियाँ अनसुलझी रह जाती हैं।
अलग-अलग सिस्टम एआई की पूरी ताकत को रोक रहे हैं
इस समस्या की जड़ है—विभागों का आपस में जुड़ा न होना। इसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ रहा है। ग्राहक बार-बार एक विभाग से दूसरे विभाग में भेजे जाने और हर बार अपनी जानकारी दोहराने से परेशान हैं। असल में समस्या यह है कि कंपनियां अभी तक अपने लोगों, डेटा और प्रक्रियाओं को एक साथ जोड़ नहीं पाई हैं, जिससे एआई अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहा।
आंकड़े भी यही तस्वीर दिखाते हैं। भारत में सिर्फ 38% कंपनियों ने अपने डेटा को एक ही जगह इकट्ठा किया है। केवल 34% कंपनियां विभागों के बीच एआई को बिना रुकावट काम करने के लिए बाधाएं कम कर रही हैं। वहीं, सिर्फ 31% कंपनियों ने अपने सीआरएम सिस्टम को इस तरह तैयार किया है कि अलग-अलग टीमों के बीच बेहतर तालमेल बन सके, जो लगातार अच्छी सेवा देने के लिए जरूरी है।
सुमीत माथुर ने आगे कहा, “स्पीड अब सिर्फ शुरुआत है, असली बात नहीं। हमारी रिसर्च बताती है कि भारतीय ग्राहक धीमी सर्विस से तो दूर होते ही हैं, लेकिन अगर सर्विस उन्हें समझ नहीं आती, तब भी वे उसे छोड़ देते हैं। अभी लीडर्स पहली समस्या पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जबकि दूसरी समस्या ही वह जगह है जहाँ असली भरोसे की कमी है। फिलहाल सिर्फ 19% कंपनियाँ ही इस दिशा में सही प्रगति कर पा रही हैं।”
अंतर तेजी से बढ़ रहा है
भारत के बिजनेस लीडर्स में एआई को लेकर महत्वाकांक्षा की कमी नहीं है, लेकिन सर्विसनाउ की रिपोर्ट एक अहम सच्चाई सामने लाती है—इरादे और असली असर के बीच की दूरी बढ़ती जा रही है, और ग्राहक इसे अब महसूस भी करने लगे हैं।
आज कंपनियों के सामने समस्या, विकल्पों की कमी नहीं बल्कि बहुत ज्यादा विकल्प होना है। एआई प्लेटफॉर्म्स की इस भीड़ में हर कोई बड़े-बड़े वादे कर रहा है। ऐसे में कंपनियां सही विकल्प के लिए इंतजार करती रह जाती हैं, जबकि ग्राहक बिना इंतजार किए अपना फैसला खुद ले रहे हैं।
आंकड़े भी यही बताते हैं—44% भारतीय ग्राहक धीमी या खराब सेवा मिलने पर दूसरी कंपनी का रुख कर लेते हैं। वहीं 45% लीडर्स भी मानते हैं कि खराब अनुभव के कारण ग्राहक छूट रहे हैं। इसके बावजूद, केवल 30% कंपनियां ही अपने लोगों, डेटा और प्रक्रियाओं को जोड़ने में सही प्रगति कर पाई हैं, जिससे एआई का पूरा फायदा मिल सके।
भारत में ग्राहक अनुभव का भविष्य वही कंपनियां तय करेंगी, जिनके पास सिर्फ उन्नत एआई नहीं, बल्कि एक जुड़ा हुआ और ग्राहकों को समझने वाला मजबूत आधार होगा। जितनी देर तक सिस्टम अलग-अलग रहेंगे, ग्राहकों की समस्या उतनी ही बढ़ेगी और उसे सुलझाना महंगा होता जाएगा।
असली सवाल यह नहीं है कि कौन सा एआई चुना जाए, बल्कि यह है कि क्या कंपनी एआई को सही तरीके से लागू करने के लिए तैयार है। इस फैसले को अब टालना ठीक नहीं होगा।


