पुणे मनपा चुनाव में उम्मीदवार चुनाव प्रचार पर भारी-भरकम राशि खर्च कर रहे हैं

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पुणे। पुणे महानगरपालिका चुनाव में नए गांवों के शामिल होने से मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। कई उम्मीदवार चुनाव प्रचार पर भारी-भरकम राशि खर्च कर रहे हैं। इससे कार्यकर्ताओं की चांदी हो गई है और पैसों के बंटवारे को लेकर कुछ इलाकों में मारपीट की घटनाएं भी सामने आई हैं। शहर के उपनगरों में चुनावी मुकाबले अत्यंत कड़े होते जा रहे हैं, वहीं बड़े नेताओं की सभाओं ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।
महानगरपालिका चुनाव में पहली बार उतरे गांवों के उम्मीदवारों ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। इन ग्रामीण उम्मीदवारों को शहर के प्रभावशाली उम्मीदवारों का समर्थन भी मिल रहा है। चुनाव से पहले सर्वे में आगे आने के लिए ही लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि चुनाव के लिए 15 से 20 करोड़ रुपये तक की तैयारी की गई है।
एक-एक प्रभाग में प्रमुख राजनीतिक दलों के चार-चार उम्मीदवार मैदान में हैं। यदि मुख्य मुकाबले में शामिल आठ उम्मीदवार प्रत्येकी 15 करोड़ रुपये खर्च करते हैं, तो कुल खर्च का आंकड़ा 120 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। इन प्रभागों में कार्यकर्ताओं पर धनवर्षा हो रही है और बस्तियों में पैसे बांटे जाने के आरोपों के चलते कई जगह विवाद और झड़पें हुई हैं।
महानगरपालिका चुनाव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच रहे हैं। बड़े नेताओं की सभाओं से माहौल और गर्म हो गया है। खास तौर पर पुणे के उपनगरों में मुकाबले बेहद कांटे के नजर आ रहे हैं। जानकारों के अनुसार, प्रत्येक प्रभाग में कम से कम 100 करोड़ रुपये का लेन-देन होने की संभावना है।
पुणे महानगरपालिका में वर्ष 2017 और 2021 में 32 गांवों को शामिल किया गया था। इन गांवों को पुराने शहरी प्रभागों से जोड़कर नए प्रभाग बनाए गए हैं। ऐसे चार प्रभागों में आर्थिक रूप से मजबूत उम्मीदवारों ने चुनावी गणित ही बदल दिया है। प्रत्येकी 15 करोड़ रुपये तक खर्च करने की तैयारियों से दो प्रमुख पैनलों द्वारा लगभग 120 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है, जिससे प्रशासनिक तंत्र भी हैरान है। इन इलाकों में आदर्श आचार संहिता की खुलेआम धज्जियां उड़ने और ‘पैसों की बारिश’ की चर्चाएं जोरों पर हैं।
पश्चिम पुणे के सुस–बानेर–पाषाण प्रभाग में पैसे बांटने के आरोप में एक मामला दर्ज किया गया है। वहीं शुक्रवार को फिर से इसी प्रभाग में ऐसे आरोपों को लेकर हंगामा हुआ।
कार्यकर्ताओं की चांदी
हड़पसर और वडगांव शेरी विधानसभा क्षेत्रों के प्रभागों में खुलेआम धन वितरण की चर्चाएं हैं। कार्यकर्ताओं को लुभाने के साथ-साथ मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन दिए जा रहे हैं। महानगरपालिका प्रशासन इन गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है, लेकिन उम्मीदवार प्रशासन को चकमा देकर अपने अभियान जारी रखे हुए हैं। मतदान से पहले के 48 घंटों में इन इलाकों में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी पृष्ठभूमि में प्रशासन से सख्त सतर्कता बरतने की मांग की जा रही है।

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