“शाकाहार केवल आहार नहीं, बल्कि संस्कार, संवेदना और जीवनमूल्य है” – आचार्य श्री कुंथुसागर महाराज

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अहिंसा और स्वास्थ्य का संदेश देने वाली शाकाहार पुस्तक का भव्य लोकार्पण

 

पुणे: महाराष्ट्र के पवित्र नमोकार तीर्थ में श्रद्धा, संस्कार और शाकाहार के संदेश का प्रेरणादायी संगम देखने को मिला। डॉ. कल्याण गंगवाल द्वारा शाकाहार विषय पर लिखित पुस्तक का लोकार्पण आचार्य श्री १०८ कुंथुसागर महाराज के करकमलों से सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर आचार्य श्री देवनंदी महाराज सहित 23 आचार्यों तथा लगभग 300 से अधिक साधु-साध्वीजी का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ।

समारोह में मार्गदर्शन करते हुए आचार्य श्री देवनंदी महाराज ने डॉ. गंगवाल के शाकाहार प्रचार-प्रसार के सातत्यपूर्ण कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज में करुणा, अहिंसा और स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली को स्थापित करने के लिए इस प्रकार का साहित्य अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है। पुस्तक में शाकाहार के महत्व को स्पष्ट करने वाले प्रेरणादायी और सचित्र लेख शामिल हैं, जो सभी आयु वर्ग के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे।

आचार्य श्री कुंथुसागर महाराज ने भी ग्रंथ की सराहना करते हुए कहा कि शाकाहार केवल आहार नहीं, बल्कि संस्कार, संवेदना और जीवनमूल्य है। ऐसे साहित्य से समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। उन्होंने शाकाहार को स्वास्थ्य, नैतिकता और अध्यात्म से जोड़ने वाला एक सशक्त सेतु बताया तथा डॉ. कल्याण गंगवाल के शाकाहार प्रचार के प्रति समर्पित कार्य की विशेष प्रशंसा की।

अपने मनोगत में डॉ. कल्याण गंगवाल ने कहा कि गुरुदेवों के आशीर्वाद से ही यह कार्य संभव हो सका। इस अवसर पर उन्होंने शाकाहार विषयक एक सचित्र प्रदर्शनी भी भेंटस्वरूप प्रस्तुत की। नमोकार तीर्थ में आयोजित यह कार्यक्रम शाकाहार आंदोलन को नई दिशा और प्रेरणा देने वाला सिद्ध हुआ।

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