मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में प्रस्ताव को मंजूरी
पुणे : राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों में भर्ती प्रक्रिया में निणर्याकपूर्ण फैसले लेते हुए बड़ा बदलाव किया है, इसमें भर्ती प्रकिया अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
इस निर्णय के तहत महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) के माध्यम से होने वाली भर्ती में व्यापक सुधार किए जाएंगे। अब संयुक्त परीक्षा प्रणाली के अंतर्गत 18 नई सेवाओं और 93 संवर्गों को शामिल किया जाएगा, जिससे कुल संवर्गों की संख्या बढ़कर 102 हो जाएगी।
सरकार द्वारा “विकसित महाराष्ट्र 2047” के विजन के तहत यह कदम उठाया गया है। वर्तमान में विभिन्न विभागों में अलग-अलग भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जाती थीं, जिससे प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली हो जाती थी। नए निर्णय के बाद परीक्षा प्रणाली को एकीकृत किया जाएगा, जिससे उम्मीदवारों को राहत मिलेगी और भर्ती प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी।
इस सुधार के अंतर्गत 574 सेवाप्रवेश नियमों में संशोधन किया जाएगा। शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और कौशल संबंधी मानकों को एकसमान और तार्किक बनाया जाएगा। खास बात यह है कि अब अधिकांश सीधी भर्ती में अनुभव की अनिवार्यता समाप्त कर दी जाएगी।
इसके अलावा, गट-ब (अराजपत्रित) और गट-क संवर्गों को प्रशासनिक और तकनीकी श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा, जिससे भर्ती प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और प्रभावी बन सके। अराजपत्रित पदों के लिए ‘नो इंटरव्यू पॉलिसी’ लागू की जाएगी, जिससे चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी।
सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि कुछ राजपत्रित पदों को अब इंटरव्यू के बजाय पदोन्नति और प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरा जाएगा। साथ ही, कालबाह्य हो चुके संवर्गों का पुनर्गठन किया जाएगा और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े नए पदों के सृजन पर भी विचार किया जाएगा।
तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देते हुए दस्तावेजों की जांच के लिए DigiLocker का उपयोग किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी। इसके साथ ही, चयन सूची में स्थान न पाने वाले उम्मीदवारों के लिए “निपुण सेतु” पोर्टल शुरू किया जाएगा, जिससे उन्हें अन्य सरकारी और निजी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।
सरकार के इस निर्णय से भर्ती प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा, परीक्षाओं की संख्या घटेगी और उम्मीदवारों को अधिक अवसर मिलेंगे। यह कदम प्रशासनिक सुधार और सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।


