जल संकट की आशंका के बीच मंत्री विखे पाटिल ने दिए अहम निर्देश

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राज्य में कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए 31 अगस्त तक पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश
– जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल

पुणे, 13 जून। महाराष्ट्र में इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा और बांधों में घटते जल भंडार को देखते हुए राज्य के नागरिकों को 31 अगस्त 2026 तक निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने अधिकारियों को दिए हैं। उन्होंने अवैध जल दोहन के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई करने का भी आदेश दिया।
सिंचन भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में कृष्णा और गोदावरी बेसिन के अंतर्गत आने वाले बांधों की जल स्थिति तथा आगामी मानसून की संभावित परिस्थितियों की समीक्षा की गई। बैठक में कृष्णा घाटी सिंचाई विकास महामंडल के कार्यकारी निदेशक हनमंत धुमाल, गोदावरी सिंचाई विकास महामंडल के कार्यकारी निदेशक जयवंत गवली सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में बताया गया कि राज्य के बांधों में वर्तमान में 357.5 टीएमसी (25 प्रतिशत) उपयोगी जल भंडार उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है। इसका प्रमुख कारण इस वर्ष अब तक अत्यंत कम वर्षा होना है। विशेष रूप से पुणे संभाग की जल स्थिति चिंताजनक होने पर मंत्री ने अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।
मंत्री ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ महानगर क्षेत्र के लगभग 85 लाख नागरिकों के लिए 31 अगस्त तक आवश्यक पेयजल सुरक्षित रखने के निर्देश दिए। साथ ही मराठवाड़ा, नाशिक, अहिल्यानगर और कृष्णा बेसिन के सभी प्रमुख जलाशयों की समीक्षा कर पेयजल के लिए आवश्यक जल आरक्षित रखने को कहा।
बैठक में जल संसाधन विभाग, जिला प्रशासन, महानगरपालिकाओं, जिला परिषदों तथा पेयजल आपूर्ति एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर तत्काल जल प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय लिया गया।
समीक्षा में सामने आया कि नाशिक क्षेत्र में वर्तमान में 26 प्रतिशत तथा मराठवाड़ा में 28 प्रतिशत उपयोगी जल भंडार उपलब्ध है। इन क्षेत्रों में अपेक्षित वर्षा नहीं होने के कारण पेयजल आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जल का अत्यंत सावधानीपूर्वक नियोजन करने के निर्देश दिए गए।
मंत्री ने कहा कि नाशिक, अहिल्यानगर, पुणे और मराठवाड़ा के जलाशयों में पर्याप्त नई जल आवक होने तक उपलब्ध पानी का अत्यंत मितव्ययी उपयोग किया जाए। मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए प्रत्येक जिले के लिए अलग कार्ययोजना तैयार कर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल संकट से निपटने तथा जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए।
उन्होंने स्थानीय प्रशासन, जल संसाधन विभाग और पेयजल एजेंसियों को समन्वय के साथ कार्य करते हुए उपलब्ध जल का उपयोग केवल अत्यावश्यक आवश्यकताओं के लिए करने तथा नागरिकों में जल संरक्षण के प्रति व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का भी आह्वान किया।
बैठक के अंत में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उपलब्ध जल का पहला अधिकार पेयजल को दिया जाए तथा अवैध जल दोहन रोकने के लिए राजस्व, पुलिस और जल संसाधन विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा विशेष अभियान चलाकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

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