250 मेधावी जैन विद्यार्थियों का सम्मान, शिक्षा के साथ संस्कार और मानवीय मूल्यों पर जोर

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पुणे : राष्ट्रसंत आचार्य सम्राट प.पू. आनंदऋषिजी म.सा. की 127वीं जन्मजयंती सप्ताह के अवसर पर वीतराग सेवा संघ (साधना सदन), पुणे की ओर से कक्षा 10वीं में विशेष योग्यता हासिल करने वाले करीब 250 जैन छात्र-छात्राओं का सम्मान किया गया। महर्षिनगर स्थित शिवशंकर सभागृह में आयोजित इस समारोह में विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और उपहार देकर सम्मानित किया गया। प.पू. रमणीक मुनिजी म.सा. आदि ठाणा-3 तथा साध्वी रत्ना प.पू. हिमानीजी म.सा. आदि ठाणा-6 के आशीर्वाद से आयोजित कार्यक्रम में सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रा. डॉ. सुरेश गोसावी प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उद्यमी, लेखक एवं प्रेरक वक्ता शरद तांदळे ने प्रमुख वक्ता के रूप में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। समारोह की अध्यक्षता विजय गांधी, CEO, M-Tech Innovation Ltd., पुणे ने की।इस अवसर पर बांठिया समूह के उद्यमी फुलचंद बांठिया, साधना सदन श्री संघ के अध्यक्ष विजयकांत कोठारी, जैन सामुदायिक उत्सव समिति के अध्यक्ष अचल जैन तथा वीतराग सेवा संघ के अध्यक्ष दिलीप कांकरिया सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

‘कम अंक आए हों, फिर भी जीवन जीना सीखें’

प्रमुख वक्ता शरद तांदळे ने विद्यार्थियों से कहा कि अंकों से किसी व्यक्ति की पूरी क्षमता और व्यक्तित्व तय नहीं होता। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ने, माता-पिता से संवाद बनाए रखने और कठिन परिस्थितियों का हंसते हुए सामना करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि आज AI और सोशल मीडिया का दौर है। सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप का उपयोग कितना करना है, इस पर विद्यार्थियों और अभिभावकों को विचार करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से देश और धर्म का इतिहास पढ़ने, मन में द्वेष न रखने तथा अपनी क्षमता से अधिक मेहनत करने की अपील की।

अभिभावकों से उन्होंने कहा कि बच्चों पर अपनी अपेक्षाओं का बोझ डालने के बजाय उनकी रुचि को समझकर उन्हें प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ आनंदपूर्वक समय बिताना और उनके साथ संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी है।

‘यह सिर्फ अंकों का नहीं, संघर्ष का सम्मान’

कुलगुरु प्रा. डॉ. सुरेश गोसावी ने कहा कि 10वीं और 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वीतराग सेवा संघ पिछले 45 वर्षों से समाजोपयोगी कार्य कर रहा है और विद्यार्थियों का सम्मान केवल उनके अंकों का सम्मान नहीं, बल्कि उनके संघर्ष का सम्मान है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जब सम्मान ग्रहण करते हैं, तब उनके साथ उनके माता-पिता और शिक्षकों का भी अप्रत्यक्ष रूप से सम्मान होता है। आज केवल गुणों से अधिक गुणवत्ता और गुणवत्ता से भी अधिक मानवीयता महत्वपूर्ण है। समाज को बुद्धिमान लोगों के साथ-साथ संवेदनशील, ईमानदार और समाज के लिए काम करने वाले लोगों की जरूरत है।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को बड़ी संपत्ति देने के बजाय अच्छे संस्कार देना अधिक महत्वपूर्ण है।

45 वर्षों से समाजसेवा में सक्रिय वीतराग सेवा संघ

वीतराग सेवा संघ की स्थापना वर्ष 1981 में साधना सदन में की गई थी। जैन समाज में धार्मिक चेतना जागृत करने और धर्म का संदेश समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से स्थापित यह संस्था पिछले 45 वर्षों से विभिन्न समाजोपयोगी कार्य कर रही है।

संघ की ओर से रक्तदान शिविर, मेधावी जैन विद्यार्थियों का सम्मान, महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव, गौसेवा, योग शिविर, स्वास्थ्य शिविर तथा जरूरतमंद लोगों और विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता जैसे विभिन्न सेवाभावी कार्य किए जाते हैं।

कार्यक्रम के दौरान वीतराग सेवा संघ की स्मरणिका का भी प्रकाशन किया गया।

विजय गांधी, फुलचंद बांठिया, विजयकांत कोठारी, अचल जैन और दिलीप कांकरिया ने भी सभी सम्मानित विद्यार्थियों का अभिनंदन करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर वीतराग सेवा संघ के सुनील मुथा, संजय मुथा, अभय नहार, कांतीलाल भंडारी, जवाहर चंगेडिया, सुनील बोकरिया, देवेंद्र मुथा सहित पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य और बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग उपस्थित थे।

कार्यक्रम का प्रास्ताविक संजय ओस्तवाल, संचालन अनिल गेलडा तथा आभार प्रदर्शन प्रवीण गुंदेचा ने किया।

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